हनी ट्रैप ने उजागर किया राजनीति का घिनौना चेहरा

हनी ट्रैप  चाल चरित्र की बातें हुईं बकवास, एमपी में आया भूचाल
विशेष रिपोर्ट। मध्यप्रदेश की राजनीति में हनी ट्रैप मामले के कारण इतना उबाल सामने आ गया है कि राजनैतिक दलों के बड़बोले नेताओं की हवा खराब हो गई है। मध्यप्रदेश की राजनीति का वह घिनौना चेहरा उजागर हुआ है जिसकी शायद किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। इंदौर की धरती में फूटे हनी ट्रैप बम ने कांग्रेस, भाजपा सहित अन्य राजनैतिक दलों में हड़कंप के हालात निर्मित कर दिए हैं। इंदौर नगर निगम में तैनात हरभजन सिंह की शिकायत दर्ज होने के बाद जैसे ही पुलिस ने पड़ताल शुरू की तो एक बड़े हाईप्रोफाइल मामले की परत खुलने लगी। किसी जमाने में राजनीति को समाजसेवा का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता था, लेकिन अब राजनीति का इस्तेमाल ऐसे कामों को करने के लिए शान से किया जाने लगा है जिसे हमारा समाज सरासर गलत मानता है। समय के साथ साथ राजनीति भी अपनी मूल भावना से कोसों दूर हो गई है। बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले ने राजनीति का वह घिनौना चेहरा बेनकाब कर दिया है जिसके बारे में शायद ही कभी किसी ने कल्पना की रही होगी। मध्यप्रदेश में पंद्रह साल भाजपा का एकछत्र राज चला है, उस दौरान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश जन जन तक पहुंचाने का काम किया गया, लेकिन हनी ट्रैप खुलासे ने उन तथाकथित नेताओं की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए जो लोकप्रियता हासिल करने के लिए सबसे अधिक बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का ढिंढोरा पीटने का दिखावा करते थे। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री और संगठन से जुड़े पावरफुल नेताओं के नाम जिस तरह से सामने आ रहे हैं उससे एक बात तो साफ हो गई है कि भारतीय राजनीति का गलियारा बेहद घिनौना हो गया है। हनी ट्रैप मामले की गूंज पूरे देश में सुनाई देने लगी है। एक गिरोह के रूप में तथाकथित महिलाओं के साथ हम बिस्तर होने वाले नेताओं की करतूत ने राजनीति के वजूद पर सबसे घातकीय प्रहार किया है। हाईप्रोफाइल हनी ट्रैप मामले की आंच सबका साथ सबका विकास करने वाली भाजपा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है। हालत इतनी गंभीर हो गई है कि भाजपा के बड़बोले नेता खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं। 
सत्ता की भूख मिटाने के लिए घटिया राजनीति का सहारा
बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले को लेकर चल रही उच्च स्तरीय जांच में खुलासा हुआ है कि मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार को निपटाने और पुनः सत्ता तक पहुंचने के लिए इन तथाकथित महिलाओं को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। योजना कुछ ऐसी बनाई गई थी कि ये शातिर और हुस्न से मालामाल महिलाएं अपने लटकों झटकों के सहारे सात से आठ विधायकों को अपना शिकार बना लें जिससे कांग्रेस सरकार की मध्य प्रदेश से विदाई बदनामी के साथ आसानी से हो जाए। एसाआईटी को हनी ट्रैप मामले की तह तक पहुंचने की जिम्मेदारी कांग्रेस सरकार ने सौंपी है। सूत्रों की मानें तो राजनीति का घिनौना चेहरा बेनकाब होने के बाद अब पूरे मध्यप्रदेश की जनता हनी ट्रैप मामले की असलियत जानना चाहता है। पंद्रह साल तक दोनों हाथों से मलाई खाने वाले नेताओं की भाजपा में पूरी फौज मौजूद है। पंद्रह साल बाद अचानक और कम सीटों से पीछे रह जाने के कारण भाजपा को अपनी सत्ता गंवानी पड़ी है। जिसे भाजपा के मध्य प्रदेश में रहने वाले तमाम नेता नहीं पचा पा रहे हैं। कांग्रेस सरकार बनने के बाद से लगातार भाजपा सत्ता तक पुनः पहुंचने के लिए हर हथकंडा अपना रही है।