आखिर भाजपा सरकार कब तक युवाओं की आवाज को दबाएं रखेगी

 


हमारे देश को आजाद हुए 73 साल हो गए लेकिन आज भी हम जातीय समीकरण मे फंसे हुए है और भाजपा के आने के बाद से जातीय भेद-भाव और बढ़ा है और इससे युवा वर्ग का न तो कोई सरोकार है और न ही लगाव युवाओ को तो बस रोजगार और उज्ज्वल भविष्य चाहिए जो देने मे भाजपा अब तक असमर्थ रही है। मै कोई राजनैतिक विशेषज्ञ तो नही लेकिन इतना तो जानता हू ,लोकतंत्र मे सरकार जनता के द्वारा और जनता के लिए होती है लेकिन जब सिर्फ एक नाम सरकार पर हावी हो जाए और खुद को सरकार घोषित कर दे तो उसे लोकतंत्र नही तानाशाही कहा जाता है और एक तानाशाह सदैव अपनी सत्ता को लेकर सशक्त रहता है वो कभी युवाओ के विचारो को प्रतिबिंबित नही कर सकता।


गत पिछले कुछ वर्षो मे सरकारी नौकरीयो मे भारी गिरावट आई है और इस कारण बड़ी संख्या मे युवा या तो बेरोजगार बैठे है या फिर आपने अध्ययन के अनुरूप काम न मिलने पर दूसरे प्रदेशों में पलायन कर वहां कोई छोटा-मोटा काम कर गुजारा करने पर विवश है। भाजपा सरकार ने युवाओ के भविष्य को अंधकार मे डाल दिया है और यही कारण है की अक्सर सरकार के प्रति युवा का आक्रोश सड़क पर देखने को मिलता है।


भाजपा के नेतृत्व मे आने के बाद अगर हम देखे तो देश मे एक असहिष्णुता का वातावरण सा बन गया है आए दिन कही न कही जातीय दंगे जिसमे सिर्फ और सिर्फ युवा वर्ग को  पीसा जाता है। जाती के नाम पर लड़ाकर सिर्फ और सिर्फ अपनी राजनीति को चमका रही सरकार युवाओ मे प्रेम और एकता के भाव को खत्म कर एक दूसरे के प्रति आक्रोश भाव संचालित कर रही यह आन्तरिक और वैश्विक सुरक्षा दोनो के लिए खतरे की बात है।


“मेक इन इंडिया” के समारोह मे सभी विदेशी वस्तुओ के प्रयोग ने यह तो दिखा ही दिया था की सरकार द्वारा युवाओ का अपना रोजगार स्थापित करने हेतु प्रोत्साहन देना दिखावा मात्र ही था। सरकार न तो रोज़गार के नए अवसर प्रदान कर रही है और न ही रिक्त पदो के लिए आवेदन निकाल रही है और तो और कुछ नियुक्ति हेतु जो चुनाव हो रहा है उसमे भी बड़े पैमाने पर धांधली देखने को मिल रही है इससे सभी युवा वर्ग का न सिर्फ मनोबल टूट रहा है बल्की वो असमाजिक कार्यो के तरफ अग्रसर हो रहे है।


किसी युवा को क्या चाहिए उच्च स्तरीय शिक्षा और उचित रोज़गार। रोजगार मे तो भारी गिरावट दर्ज की ही गई है साथ ही साथ अब हम यह भी देखते है की शैक्षिक संस्थानो पर पाबन्दी लगा कर युवाओ के आवाज को दबाने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। अगर भाजपा युवा के विचार को प्रतिबिंबित कर रहा होता तो लगातार शैक्षिक संस्थानो के युवा सरकार के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त न करते।


किसी भी देश का उज्ज्वल भविष्य उस देश के युवाओ के हाथ मे होता है और जब कोई सरकार उन युवाओ से उनका हक छीन उनके आवाज को दबाने प्रयास करती है तो उस का परिणाम कफी गम्भीर और व्यापम होता है।


मै खुद एक युवा हू और मै भारतीय संविधान और सरकार दोनो मे आस्था रखता हू क्योकि संविधान हमारे हित के लिए है और सरकार हमारी सेवा और हितो के रक्षा के लिए लेकीन जब वो ही सरकार हमारे हितो का हनन करना आरंभ कर दे तो ऐसे सरकार के विरूद्ध क्रान्ति का बिगुल बजाना भी हम युवा का ही उत्तरदायित्व बन जाता है खास कर अभी की सरकार जो बहुमत के साथ सत्ता मे आई है ,  लेकिन ये भारतीय सरकार होने से ज्यादा एक व्यक्ति विशेष की सरकार ज्यादा प्रतीत होती है।


अंतः मै फिर से यही कहना चाहता हू की मै कोई राजनैतिक विशेषज्ञ तो नही लेकिन एक युवा जरूर हू और मुझे यह साफ-साफ दिखता है की भाजपा सिर्फ और सिर्फ अपने सत्ता को बचाये रखने के प्रयास मे लगी है। युवा वर्ग और युवा विचार से इनका दूर-दूर तक कोई सरोकार नही दिखता। युवा वर्ग के विचार को प्रतिबिंबित करना एक मात्र दिखावा भर है जबकि सच्चाई तो यह है की यह युवा वर्ग पर भी अपने विचारधारा थोप रहा है।


सत्ता किसी के भी हाथ मे हो जनसंख्या नियंत्रण, शिक्षा और रोजगार पर बल नही दिया गया तो भारत का लोकतंत्र खतरे मे आ सकता है। जिस हिसाब से अभी लगातार जनसंख्या वृद्धि हो रहा है और शिक्षित होने के बावजूद भी युवाओ को रोजगार नही मिल रहा है ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत नही होगा की आने वाले समय मे हमे शिक्षित अपराधी और शिक्षित उग्रवादी भारी संख्या मे देखने को मिलेंगे और इन सबका जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ सत्ता पर बैठे लोग और उनकी बेबुनियाद और खोखली नितीयाँ ही होगी।
    अपने  साथियों के लिए कुछ चंद लाइनों...


"क्या चीज था क्या बन गया
पर्दा अब है हट गया
सचाई जो छुपी पर्दे तले
बेपर्दा तूने कर दिया"..


इस लेख में व्यक्त विचार समाजसेवी अरुण कुमार पटेल (कोर्राखुर्द) के निजी विचार है


कभी समय मिले तो आप भी अपने मन के दर्पण मे झांकने का प्रयास जरूर करे।