चींटी की चाल चल रहा 2000 करोड़ का रेलवे प्रोजेक्ट ठेकेदारों के मैनेज सिस्टम के कारण मिलता है संरक्षण



रीवा विशेष रिपोर्ट।‌ इंडियन रेलवे के विकास कार्यों पर ठेकेदार पलीता लगा रहे हैं तो जिम्मेदार अधिकारी मैनेज सिस्टम के कारण संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। यही वजह है कि रीवा रेलवे स्टेशन में करोड़ों के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट चींटी की चाल चलने के लिए मजबूर नजर आते हैं।‌ जबलपुर रेल मंडल के रीवा रेलवे स्टेशन में तकरीबन 2000 करोड़ का अलग-अलग प्रोजेक्ट चल रहा है। भारी विलंब होने के कारण जनमानस का इंतजार निरंतर बढता जा रहा है। विंध्य क्षेत्र की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण ललितपुर सिंगरौली रेल परियोजना की हालत सबसे अधिक खराब है। सन् 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने मध्य प्रदेश के खजुराहो पहुंच कर ललितपुर सिंगरौली 541 किलोमीटर की रेल परियोजना का भूमि-पूजन किया था।‌ इसके बाद से रेलवे के अधिकारियों को जिला प्रशासन का जो परस्पर सहयोग मिलना चाहिए वह अब तक मिलता हुआ नजर नहीं आया है। 925 करोड़ की लागत से शुरू हुई यह रेल परियोजना विलंब के कारण अब तकरीबन 1400 करोड़ पहुंच गई है। अभी भी इस रेल परियोजना को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। रीवा से बरगवां 164 किलोमीटर का काम शुरू नहीं हो पाया है। इसी तरह खजुराहो के आगे भी रेल परियोजना का कार्य आगे नहीं बढ़ पाया है। साल 2022 तक इस रेल परियोजना को पूरा करने का टारगेट केंद्र की मोदी सरकार ने दिया है। लेकिन ऐसा होने की उम्मीद दूर दूर तक नजर नहीं आती है।