दीमक की तरह चाट गए मैंहर के विकास को ठेकेदार व पेटि कन्टेक्टरो ने।

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गढ्ढो का स्वाद चख रहे क्षेत्रवासी। कांग्रेस एवम मैंहर के लोग दुर्विन लगाकर ढूंढ रहे विकास को की किस कोने में छुपा है।


मैंहर। वैसे तो मैंहर विकास का दम देश की राजधानी से लेकर राज्य की मिनी राजधानी वाले भी दम भरते है उसके बाद भी मैंहर शहरवासियों व ग्राम वासियों को गढ्ढे ही गढ्ढे मील रहे है, जानकारों की माने तो चाहे धार्मिक नगरी हो या शहरी क्षेत्र दोनों को लेकर बैठके तो ऐसी होती है ताबड़तोड़ की मानो बैठकों के दूसरे दिन ही जादू से क्षेत्र स्मार्ट हो जाएगा ? अभी कुछ दिनों पहले लगातार जिले के कलेक्टर व स्थानी जनप्रतिनिधियो ने मैंहर क्षेत्र के साथ धार्मिक नगरी को भी गंभीरता से मुआयना किया पैदल चलकर लेकिन धरातल में सब कुछ वर्षो पुराने ढर्रे पर चल रहा है यही नही जो भी निर्माण मिनी स्मार्ट सिटी के बनाने में चल रहा वो भी भष्ट्र लोगो की सोच के कारण भरपूर भष्ट्राचार चल रहा है, सबसे बड़ी बात की सरकार ने सबकुछ ऑनलाइन कर दिया लेकिन धरातल पर जो भी निर्माण हो रहा उसकी भी निगरानी ऑनलाइन ही चल रहा है



अब इसके बीच जो सबसे बड़ा भष्ट्राचार का खेल हो रहा है जो अलग से दबे फाइल में होती है जिसका नाम,,, पेटिकन्टेक्ट,,, का जो ऑफलाइन आपस मे होती है यानी देश मे सबसे बड़ा कीड़ा पेटिकन्टेक्ट का सिस्टम जो विकास में रोड़ा बन रहा है और एक टेंडर पर कई लोग कमाने के चक्कर मे ये घिनौना खेल खेला जाता है और जब काम की बारी आती है तो टेंडर अनुसार रेता का उपयोग की जगह पर सस्ता कचड़े को जिसका नाम,, डस्ट ,, का उपयोग होता है या आसपास की छोटे बड़े नदियों की मिट्टी रहित रेता का और सरिया भी मनमानी अनुसार उपयोग कर निर्माण को दिखावे के लिए या यूं कहें कि किसी तरह सरकारी रुपया जेब मे आ जाये फिर चाहे एक दो महीने में ही भष्ट्राचार से बनी निर्माण जमींदोज ही क्यो न हो जाये ,, जैसा कि एक बार मैंहर में हाउंसिंग बोर्ड कालोनी में हुआ था,, इसी तरह इन दिनों मैंहर की धरती को स्वर्ग यानी मिनी स्मार्ट सिटी बनाने का ठेका शिवराज सिंह चौहान के सरकार में संजय सिंह चौहान ने किसी तरह लिया लेकिन सरकार बदलते ही कांग्रेस की कमलनाथ की सरकार बन गई उसमे भी ठेकेदार संजय सिंह की चांदी हो है क्योंकि ठेकेदार संजय सिंह के पिता पुराने कांग्रेसी और मैंहर में मठाधीस है जिसका फायदा भरपूर उठा रहे, बात यही नही खत्म हो रही ठेकेदार संजय सिंह की ऐसा खेल खेला गया कि मिनी स्मार्ट सिटी के तहत चाहे किसी भी तरह निर्माण हो कोई रोक टोक नहो इस लिए जिला एवम स्थानीय लोगो के पास किसी भी तरह की देखरेख एवम जांच करने का कोई अधिकारी नही केवल देखरेख जबलपुर डिवीजन के देखरेख में किया जाएगा ताकि ठेकेदार खूब दिलखोलकर मनमानी कर सके। सबसे बड़ी बात की एक वर्ष से ऊपर हो चुके लेकिन मैंहर का कोई एक कोना मिनी नही बना तो स्मार्ट तो बहुत दूर है आज भी मैंहर क्षेत्र के लोग धूल धक्कड़ से बीमारी के शिकार जरूर हो रहे है, अगर यही हाल रहा तो दीमक कीतरह मैंहर का विकास तो चाट ही गए है इंसानों को बिना मिर्च मसाला के चाट जाएंगे और जिला के व तहसील के नेता व कलेक्टर धूल धक्कड़ वाली सड़को का निरीक्षण कर हाथ मलते रह जाएंगे और मिनी स्मार्ट के ठेकेदार रीवा में बैठे जेब गर्म कर निकल जाएंगे।