देश की सुरक्षा में बड़ी चूक, एमपी सहित पूर्वोत्तर राज्यों में फैला है नेटवर्क

 


जबलपुर✍ मोबाइल के आईएमईआई (यूनिक इंटरनेशनल मोबाइल इक्यूपमेंट आईडेंटिटी) नम्बर से ही लूट, हत्या, चोरी व अपहरण जैसे मामले में सायबर सेल पता लगाती है। पर जिस तरह से शहर में धड़ल्ले से आईएमईआई नम्बर बदलने का खेल चल रहा है, उसने पुलिस की परेशानी बढ़ा दी है। आईजी जोन की साइबर सेल ने जयंती कॉम्प्लेक्स स्थित दुकान संचालक प्रदीप ठाकुर को गिरफ्तार कर देश भर में एक ही डेमो आईएमईआई नम्बर से संचालित एक लाख से अधिक मोबाइल संचालित होने का खुलासा किया, उससे देश भर की सुरक्षा एजेंसियां भी चौकन्नी हो गई हैं। अब प्रकरण भोपाल पुलिस मुख्यालय से देश के गृह विभाग और टेलीकॉम मंत्रालय तक पहुंच गया है। केस-एक 31 मार्च 2019 को लार्डगंज, मदनमहल व ओमती पुलिस ने संयुक्त रूप से जयंती कॉम्प्लेक्स में मां मोबाइल दुकान के संचालक सिंधी कैम्प निवासी आकाश को दबोचा था। वह लूट के मोबाइल का आइएमइआइ नम्बर बदल देता था। केस-दो 16 सितम्बर 2018 को गोहलपुर पुलिस ने मिलौनीगंज मछली मार्केट के पीछे केजीएन मोबाइल शॉप में दबिश देकर संचालक नवी अहमद केा दाबेचा था। वह चोरी के मोबाइलों का आईएमईआई नम्बर बदल देता था। केस-तीन 05 नवम्बर 2017 को क्राइम ब्रांच ने शीतलामाई में प्रतीक मोबाइल नाम से दुकान चलाने वाले घमापुर निवासी ऋषि चौरसिया को गिरफ्तार किया था। वह चाइनीज सॉफ्टवेयर से आइएमइआइ नम्बर बदल देता था। सर्विस सेंटर का कर्मी फरार आईजी विवेक शर्मा के साथ प्रेसवार्ता में मौजूद एसपी अमित सिंह व एएसपी क्राइम शिवेश सिंह बघेल ने बताया कि आरोपी प्रदीप ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद सर्चिंग में सामने आए 125 मोबाइलधारकों को बुलाकर पूछताछ की गई तो पता चला कि इन मोबाइलों में कुछ की रिपेयरिंग सर्विस सेंटर और मोबाइल रिपेयरिंग शॉप में कराई गई थी। कुछ सेट लोगों को गिरे मिले थे तो कुछ ने सेकेंड हैंड खरीदा था। प्रदीप को आईएमईईआई बदलने का सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने वाले वीवो मोबाइल सर्विस सेंटर के फरार कर्मी से इस हाइप्रोफाइल प्रकरण में और खुलासे की उम्मीद है। एक ही डेमो आईएमईआई का प्रयोग कर एक लाख से अधिक मोबाइलों की पहचान बदली गई?


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