कौन बनेगा करोड़पति के नाम पर देशभर में हो रही थी ठगी, सतना के युवक ने अब तक 2 करोड़ से ज्यादा उड़ाए


सतना/ एक साल पहले कौन बनेगा करोड़पति टीवी सीरियल के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का सरगना सतना निवासी पुष्पेन्द्र सिंह उर्फ पिंटू इंदौर में गिरफ्तार कर लिया गया है। पाकिस्तानी ठगों के साथ मिलकर लाटरी का आनलाइन ठगी का भी कारोबार करता था। इसका काम भी एक तरह से टेरर फंडिंग के आरोपी बलराम की ही तरह था। इसके और साथी पहले ही पकड़े जा चुके थे।
जानकारी के अनुसार कौन बनेगा करोड़पति टीवी सीरियल के नाम पर लोगों को झांसा देकर ठगी करने वाला सतना सिद्धार्थ नगर निवासी फरार चल रहा था। इसकी तलाश में एसटीएफ जुटी हुई थी। उसके कई साथी पहले पकड़े जा चुके थे। इंदौर एसपी पद्मविलोचन शुक्ला ने बताया कि फरार आरोपी पुष्पेंद्र उर्फ पिंटू पिता राजरुपसिंह निवासी सिद्धार्थ नगर सतना को गिरफ्तार किया गया है।
दिसंबर 2018 में एसटीएफ ने अंतरराष्ट्रीय कॉल व अलग अलग देश के मोबाइल नंबर से देशभर में लोगों को कॉल कर लाटरी सहित कौन बनेगा करोड़पति शो में लाखों का इनाम मिलने का झांसा देकर लाखों की ठगी की थी। इस मामले में धोखाधड़ी का केस दर्ज होने के बाद एसटीएफ ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। इस मामले में पुष्पेन्द्र मनीष भालसे, मानेद्र सिंह, सुजीत सिंह, करण, ब्रजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया था।



40 बैंक अकाउंट व 30 एटीएम कार्ड आरोपियोंं से जब्त



बाद में पता चला कि पुष्पेंद्र के बैंक अकाउंट में ठगी के 1 करोड़ 93 लाख, मनीष के अकाउंट में 38 लाख, मानेंद्र के अकाउंट में 34 लाख, सुजीत के अकाउंट में 29 लाख, ब्रजेंद्र के अकाउंट में छह लाख रुपए जमा हुए थे। उस समय 40 बैंक अकाउंट व 30 एटीएम कार्ड आरोपियोंं से जब्त हुए थे। सातवां आरोपी पुष्पेंद्र उर्फ पिंटू फरार हो गया था। फरारी के दौरान उसने अग्रिम जमानत का प्रयास किया लेकिन आवेदन निरस्त हो गया। मंगलवार को भी वह कोर्ट में पेश हुआ था जहां से 22 नवंबर तक रिमांड पर सौंपा गया। आरोपी पुष्पेंद्र के अकाउंट में 20 लाख रुपए जमा होने की बात सामने आई है।
पाकिस्तानी ठगों के साथ कर रहा था ठगी का कारोबार एसटीएफ टीआई एमए सैयद के मुताबिक, पाकिस्तानी ठग छोटे मामू, बडे मामू द्वारा गिरोह संचालित हो रहा था। विदेश के नंबरों का इस्तेमाल कर वे लोगों को झांसा देते और फिर पुष्पेन्द्र और उसके साथियों के अकाउंट में पैसा डलवाते थे। ठगी के पैसे से 3 से 7 प्रतिशत आरोपियों को मिलता व बाकी पैसा हवाला के जरिए विदेश पहुंचा दिया जाता था।