माननीय राज्यपाल के कर कमलों से पंड़ित एस0एन0 शुक्ला विश्वविद्यालय का लोकार्पण सम्पन्न

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नई तकनीक के साथ पुरातन संस्कृति को बचाकर रखना होगाः- माननीय राज्यपाल श्री लालजी टंडन
विश्वविद्यालय परिसर में अनुसूचित जाति- जनजाति के विद्यार्थियों के लिए बनाये जाएगें बालक एवं बालिका छात्रावास
शहडोल - आजादी की लड़ाई के बाद हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बना है और अब विश्व के शक्तिशाली देश बनाने की ओर अग्रसर है। स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों ने गांधी जी के नेतृत्व में अपना जीवन जेल में बिताते थें, वहां से छुटने के बाद जो समय मिलता था उसका उपयोग समाजहित में करते थे, पंडित शंम्भूनाथ शुक्ला भी उनमें से एक थें। विश्वविद्यालय के पाठयक्रम में नई तकनीक के ज्ञान के साथ पुरातन संस्कृति को बचाए रखने हेतु विश्वविद्यालय में अध्ययन की व्यवस्था होना चाहिए। नैतिकता, अनुशासन के साथ ही शैक्षणिक गुणवत्ता इतनी अच्छी होनी चाहिए कि हमारी शिक्षण पद्वति का अनुसरण विदेशी विश्व विद्यालय भी करें। विश्वविद्यालय की स्थापना आदिवासी वर्ग के विद्यार्थियो के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए की गई है। उसका लाभ उन लोगों को मिलेगा तभी संस्था के संस्थापक स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी पंडित शम्भूनाथ शुक्ला को हम सच्ची श्रंद्वाजलि दे पाएंगे। मध्यप्रदेश के माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री लालजी टंडन आज संभागीय मुख्यालय शहडोल में पंडित शंम्भूनाथ शुक्ला विश्व विद्यालय के लोकार्पण समारोह को सम्बांेधित कर रहे थे।



       इस अवसर पर प्रदेष शासन के उच्च षिक्षा मंत्री श्री जीतू पटवारी, आदिवासी  विकास विभाग के मंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओमकार सिंह मरकाम, विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मुकेश तिवारी, आयुक्त शहडोल संभाग श्री आर.बी. प्रजापति, पुलिस महानिरीक्षक शहडोल रंेज श्री एस.पी. सिंह, कलेक्टर श्री ललित दाहिमा, पुलिस अधीक्षक श्री निमिष अग्रवाल सहित विश्वविद्यालय परिवार जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, मीडिया के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
  माननीय राज्यपाल श्री लाल जी टंडन ने कहा कि प्रदेश में विश्वविद्यालयों को क्लीन एवं ग्रीन कैम्पस की अवधारणा को सकार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने पर्यावरण की दृष्टि से वृक्षारोपण, जल संरक्षण एवं संर्वद्वन,  रूफ वाटर हार्वेस्टिंग, सोलर एनेर्जी की व्यवस्था की जाएं। जिससे एक ओर हम विश्वविद्यालय के आर्थिक खर्चें में कमी ला सकेगे वहीं विद्यार्थियों में आज की आवश्यकतानुसार समाज उपयोगी इन कार्याें के संस्कार दे सकेगेें। उन्होने कहा कि विश्वविद्यालय आदिवासी कला एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए शोधपीठ स्थापित करें। गांधीजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने हेतु गांधी पीठ की स्थापना की जाए।



  माननीय राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा नीति राष्ट्र से जुड़ी होती है जो भावी पीढ़ी का मार्गदर्शन करती है। शिक्षा को राजनीत से दूर रखना चाहिए। प्रदेश के इस विश्वविद्यालय का स्तर इतना अच्छा हो कि अभिभावक अपने बच्चांे को शिक्षा हेतु प्रवेश दिलाने के लिए प्रयासरत रहें। जिससे शताब्दियों तक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते रहे। समय के साथ पाठयक्रम संचालित करते हुए शिक्षा के स्तर में वृद्वि करनी होगी। विश्वविद्यालय संचालन सरकार के अनुदान पर ही नहीं बल्कि रूसा तथा समाज के सहयोग से होना चाहिए। नेक ग्रेडिंग में सफल होने के लिए अभी से तैयारी की जानी चाहिए। 
  प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री श्री जीतू पटवारी ने कहा कि शिक्षा को रोजगार से जोड़ा जाए। शिक्षा संमृद्वि समाज का निर्माण करती है। आपने कहा कि  उच्च शिक्षा में शिक्षकों की जो कमी थी। उसे शीघ्र पूरा किया जा रहा है। प्रदेश में 200 काॅलेजो का अपग्रेडेशन किया गया है। वहाॅ पर्यावरण की दृष्टि से हरियाली कैम्पर्स विकसित किए जा रहे है। यह विश्व विद्यालय सबसे पीछे, सबसे नीचे के विद्यार्थियों के लिए काम करते हुए गाॅधी जी के आदर्शो के लिए समर्पित रहेगा। उन्होनें विश्व विद्यालय को हाइवे से जोड़ने, विद्यार्थियों के आवागमन के लिए निःशुल्क व्यवस्था की भी बात कही। 
 प्रभारी मंत्री श्री ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि देश की प्रगति उस देश की शिक्षा पर निर्भर होती है, शिक्षा के बिना जीवन अधूरा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री  जी की मंशा हे कि गरीबों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जायें। विश्व विद्यालय इस पर खरा उतरेगा। ऐसा मेरा मानना है। आपने विद्यार्थियों को आह्वान किया कि चुनौती कुछ भी हो, लक्ष्य से कभी नही भटकें। विद्यार्थी नशे से दूर रहे तभी लक्ष्य प्राप्त करने में सफल होंगे। आपने कहा कि कार्यक्रमो मंे फूल माला से स्वागत की जगह पेन एवं काॅपी से स्वागत का निर्णय लिया है, जो गरीब बच्चो को बाॅट दी जाती है। अभी तक 25 हजार बच्चो को यह उपहार वितरित किया गया है। प्रभारी मंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर में अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों के लिए बालक एवं बालिका छात्रावास बनाएॅ जाने की बात कही।



 पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्व विद्यालय के कुलपति श्री मुकेश तिवारी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह एकल एवं असंवद्ध विश्व विद्यालय है। कैम्पस 43 एकड़ का है, जिसमें प्रशासनिक भवन, छात्रावास, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, अध्ययन कक्षाएॅ तथा प्रयोगशाला का निर्माण कराया गया है। भवन का क्षेत्रफल 17 हजार 146 वर्गमीटर है। भवन निर्माण हेतु 55 करोड़ रूपये मंजूर किए गए थे जिसमें से 44 करोड़ रूपये व्यय किए जा चुके है, शेष राशि से अन्य सुविधाएॅ विकसित की जायेगी। विश्व विद्यालय कैम्पस वाई-फाई, कैशलेस सुविधा, सोलर पैनल की सुविधा है। वर्तमान में 7 हजार 500 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे है। इस विद्यालय द्वारा रोजगार मूलक शिक्षा भी प्रारम्भ की गई है। इसके साथ ही विश्व विद्यालय के प्राध्यापको द्वारा टीव्ही पीड़ित बच्चो को गोद में लिया गया है। आगे कुपोषित बच्चो को गोद में लेने की योजना है। विश्व विद्यालय आदिवासी कला संस्कृति के संरक्षण एवं शोध का कार्य प्राथमिकता के साथ करने के लिए संकल्पित है। आभार विश्व विद्यालय के कुल सचिव श्री विनय सिंह ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ एवं समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ।