महाराष्ट्र की ताजपोस गद्दी को कुछ इस अंदाज में समझिए

 


महाराष्ट्र में हाल ही में जो चुनाव हुए उसका घटनाक्रम हम कुछ इस तरह से समझ सकते हैं। चुनाव परिणाम के पहले ही शिवसेना और बीजेपी ने एक पजामा सिलवा लिया। इस पजामे को पहले कौन पहनेगा इस पर घमासान हुआ। शिवसेना ने बीजेपी से कहा ढाई साल हम पहनेंगे, ढाई साल तुम पहनना। इस खींचतान में दोनों पार्टियों ने पजामे के एक-एक सिरे को पकड़ कर छीना झपटी में दो टुकड़े कर दिए। बीजेपी ने फटे पजामे को उद्धव को लौटा कर कह दिया ले लो इस पजामे को अब तुम ही पहनना। उद्धव फटे पजामे को लेकर शरद पंवार के पास गया। शरद पवार ने कहा तुम आज आज यह पजामा मेरे पास छोड़ दो, कल तक मैं कुछ करता हूं। दूसरे दिन पंवार ने उद्धव को बुलाया और कहा इस पजामे की एक टांग तुम्हारी एक टांग राहुल गांधी की और नाडा मेरा। इस बीच कांग्रेस ने शरद पवार को कहा अभी पजामे में नाड़ा मत डालना। राज्यपाल ने अचानक शिवसेना को बुलाया और कहा तुम्हारे पास पजामा हो तो कल तक पहन के दिखा दो। कांग्रेस ने पजामे में टांग तो डाल दी मगर उसे फंसी की फंसी रखी बाहर नहीं निकाली। समय चला चला गया। राज्यपाल ने दुकान के शटर लगाकर सील चपड़ी लगाकर ताला लगा दिया। आधी रात को अमित शाह नाम के दर्जी ने अजित पवार से कहा वह पजामा कैसे भी करके शरद पवार के घर से लेकर आ जाओ। अजित पवार दबे पांव शरद पवार के घर गया और पजामा चुरा के ले आया। अमित शाह ने देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार से कहा कि कल सुबह 8:00 बजे का मुहूर्त है तुम दोनों यह पजामा पहन लेना। मुहूर्त के समय अजीत पवार को पता चला की पजामे का नाडा तो मैं शरद पवार के घर ही भूल कर आ गया। दोनों ने आनन-फानन में बिना नाड़े वाले पजामें को पकड़े -पकड़े ही शपथ ली।इधर शरद पंवार खेमे में हलचल हो गई कोई पजामा चुरा ले गया नाड़ा छोड़ गया।शरद पंवार ने अब नया पजामा सिलवाकर शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के विधायकों को एक होटल में बुलाया और नए पजामे को निहारते  रहने की शपथ दिलाई।