मंदिर के प्रमाण, लेकिन तोड़कर मस्जिद बनाने का सबूत नहीं: एएसआई के पूर्व महानिदेशक

सबूत नहीं: एएसआई के पूर्व नई दिल्ली। वर्ष 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने के बाद प्रदेश सरकार ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के - महानिदेशक डॉ. राकेश तिवारी को मौके पर बची वस्तुओं को सूचीबद्ध करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने रामकथा कुंज में बिखरे मलबे में से लगभग दो सौ वस्तुओं की सूची तैयार की। इनमें मूर्तियां, कलश, अभिलिखित शिलापट और प्रस्तर मंदिरों के अवशेष प्रमुख थे। इसके बाद में तिवारी को हाईकोर्ट ने सूचीबद्ध वस्तुओं से संबंधित रिपोर्ट की तस्दीक करने के लिए बुलाया था। मुस्लिम पक्ष के लोग ये सवाल उठाते रहे कि ये वस्तुएं बाहर से लाकर भी वहां डाली जा विस्मयबोधक सकती हैं। दूसरी ओर यह तर्क भी था कि ढांचा ढहाए जाने के तत्काल बाद वहां अभेद्य सुरक्षा इंतजाम कर दिए गए थे, जिससे बाहर से वस्तुएं डालने की संभावना काफी कम थी। इन दोनों ही दृष्टिकोणों पर डॉ. तिवारी की रिपोर्ट में कुछ नहीं कहा गया था, लेकिन जब मुस्लिम पक्ष के वकील ने उनसे यह पूछा कि ये क्या वस्तुएं हैं। रिपोर्ट पूर्व - अयोध्या में मंदिर ढहाया गया या किसी आपदा में खुद गिर गया, प्राचीन धार्मिक, साहित्यिक व ऐतिहासिक ग्रंथों के आधार पर राम का जो कालखंड माना जाता है, तब वर्तमान अयोध्या में मानवीय गतिविधियां थीं भी या नहीं, ये कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनके उत्तर के आखिर में विस्मयबोधक चिह्न जरूर लगाने पड़ेंगे। दरअसल, जवाब के साथ अकाट्य प्रमाण नहीं, परिस्थितिजन्य साक्ष्य ही उपलब्ध हैं। वहां मंदिर होने के प्रमाण तो हैं, लेकिन उसे तोड़कर मस्जिद बनाने के सुबूत नहीं। एएसआई की आधिकारिक रिपोर्ट में तीन मुख्य बातें कही गई हैं।