सरकार की दमनकारी नीतियों के चलते दम तोड़ रहे है लघु एवं मध्यम समाचार पत्र 


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार की भेदभाव पूर्ण एवं दमनकारी नीतियों के चलते प्रदेश के लघु एवं मध्यम समाचार पत्र पत्रिकाए बन्द होने की कगार पर पहुंच गये है। कई समाचार पत्र तो बन्द भी हो चुके है तो कुछ अखबारों के तफतरो में ताला डालने की नौबत आ गई है ।
मध्य प्रदेश में काग्रेस की सरकार बने लगभग एक साल होने को आए.इस एक साल मे जितना भेदभाव समाचार पत्र पत्रिकाओ के साथ किया किसी के साथ नहीं हुआ। प्रदेश की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री कमलनाथ तथा जनसम्पर्क मन्त्री पीसी शर्मा ने मीडिया जगत को दरकिनार करते हुए उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया। कांग्रेस सरकार से पूर्व मध्यप्रदेश शासन की विज्ञापन सूची मे शामिल सभी दैनिक समाचार पत्र पत्रिकाओं को निरंतर विज्ञापन जारी हुआ करते थे। जैसे ही नई सरकार सत्ता मे आई लघु एवं मध्यम समाचार पत्र पत्रिकाओ को कुचलने की साजिश रची गई और धीरे-धीरे उनके विज्ञापन बन्द कर उनके विज्ञापन बिलों का भुगतान रोक कर उन्हे आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया गया जिससे लघु एवं मध्यम समाचार पत्र पत्रिकाए बन्द हो जाए। साप्ताहिक तथा मासिक पत्रिकाओं को साल मे मिलने वाले 4 विज्ञापनों मे कटौती कर दी गई.सरकार के इस रवैये के चलते प्रदेश के पत्रकारों मे रोष व्याप्त है और आने वाले कुछ दिनों मे बडा आंदोलन करने की तैयारी मे एकजुट हो रहा है।


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