सरपंच करती रही मजदूरी उपसरपंच करता रहा भ्रष्टाचार ,उपसरपंच/ सचिव के कारनामो से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी खरमसेड़ा ग्राम पंचायत।

 


अमरपाटन: पहुंच मार्ग बना नही और राशि...गप्प.... स्कूल निर्माण का कार्य अधूरा लेकिन पूर्ण बताकर राशि..गप्प.. अधूरा बना पंचायत भवन भी पूर्ण आकार लेने की बात जोह रहा है लेकिन यह राशि भी निकाल कर गप्प... पंचायत में विकास कार्य शुरू तो हुए लेकिन पूर्ण न हो पाए...लेकिन राशि आहरित कर...गप्प । पीएम आवास दिया नही लेकिन कमीशन..गप्प । जी हां साहब...कुछ यही हालात है *मप्र की सबसे बड़ी जनपद पंचायत अमरपाटन की ग्राम पंचायत खरमसेड़ा की....


जहां सरपंच के नाम पर उपसरपंच सचिव की जोड़ी ने अब तक पंचायत के विकास नाम पर जो किया है वो है....योजनाओं की राशि को गप्प । पंचायती राज को इस सोच के साथ गढ़ा गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों का चहुंमुखी विकास हो सके लेकिन लगता है कि कुछ सरपंचों - सचिवों के लिए यह पंचायत चारागाह बन गयी है । कमल बाबू...चुनाव के दौरान आपने शिवराज सरकार में चल रहे भृष्टरचर के खेल को प्रमुखता से उठाया लेकिन अब कुर्सी पर आप है और आपके राज़ में भी वो ही पाप कायम है । सरपंच आदिवासी अंचल के इस पंचायत खरमसेड़ा में गुणा भाग का खेल खुलकर है । निर्माण कार्य की शुरुआत हुई ज़रूर...लेकिन विकास कार्य अधूरा ही छोड़कर ..बल्कि फ़र्ज़ी बिल लगा...लाखों रुपए अपनी जेब के हवाले कर लिए । और यदि भगवान की कृपा से कुछ निर्माण हो भी गया तो गुणवत्ता ऐसी कि उफ़्फ़.. देखकर खुद ही रोना आ जाये । सचिव विश्वनाथ चतुर्वेदी और सरपंच के नाम पर उपसरपंच रामलखन पटेल की जोड़ी पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं । नियम है कि पंचायत कर्मियों का कोई भी रिश्तेदार वेंडर नही हो सकता है लेकिन जलवा देखिये...सचिव साहब ने अपने रिश्तेदार रोहित ट्रेलर्स को ही वेंडर बना दिया। रोहित और शुभी एवं बालेंद्र कुमार गुप्ता के अलावा अन्य कोई वेंडर को यहां फटक भी नही सकता । खुद सरपंच के पति के नाम से बिल लगाकर जमकर चांदी काट ली गयी स्थानीय लोगों का सरपंच , उपसरपंच/सचिव पर यह भी आरोप हैं कि वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन नही दी जा रही है और तो और राषन का भी टोटा है..क्योंकि उनके पास कमीशन देने के पैसे जो नही है । ग्रामीणों ने पूरी शिकायत लिखित में जनपद सीईओ से की लेकिन सांठ गांठ के चलते यहां भी शिकायत फाइलों में दबकर दम तोड़ गयी । सचिव/ सरपंच/ उपसरपंच का हौसला देखिये...साफ साफ कहतें है कि वह तो मोहरे हैं ..आला अफसर भी इसी कहानी के किरदार हैं । ज़ाहिर हैं ऐसे हालात में ग्रामीण मजबूर हैं तो शासन - प्रशासन बेसुध...आवश्यज है कि इस तरह के भ्रष्ट्राचारियो पर तत्काल कार्रवाई हो अन्यथा उफ़्फ़..विकास की आस तो छोड़िए ..यह पूरा क्षेत्र बद से बदतर हालात में पहुंच जाएगा ।