तीन आरक्षकों की तिकड़ी ने एबम जातिवाद का जहर निगल लिया पूरे थाना को*

 


*शर्मसार कर रहे ईमानदार पुलिस अधीक्षक को*
 
रीवा।वैसे तो रीवा पुलिस हमेशा की अपने नए नए कारनामे को लेकर चर्चा में रहती आई है।
और हमेशा ही शर्मसार ईमानदार पुलिस अधीक्षक को होना पड़ता है।
 हाल ही में अगर  शहरी थाने में बात करे तो थाना सिविल लाइन में इस समय 3 आरक्षकों की टोली पूरे थाने को भारी पड़ रही है ये आरक्षक इतने ताकतवर है कि थाना में पदस्थ आरक्षक से लेकर थाना प्रभारी तक सब पर भारी पड़ते नजर आ रहे है थाने में पदस्थ मुंसी,सहायक उपनिरीक्षक एबम उपनिरीक्षक घटना के आधार पर कोई जांच नही कर सकते अगर करना चाहे तो इनको पहले इन्ही तीन की तिकड़ी से अनुमति लेना पड़ेगा उसके बाद तय होगा कि किस पर क्या और कब कार्यबाही करनी है।ये थाने से महज 200 मीटर की दूरी पर बैठकर रणनीति बनाते है साथ ही इसी जगह पर बैठकर अपराध जगत के नामी गिरामी लोगो से मुलाकात करते है ।और फिर उसके बाद आगे की रणनीति बनाते हुए थाने को चलाते है।


तो ऐसा ही कुछ हाल बिछिया थाना का है बिछिया थाने में  इस समय जति बाद का जहर इस कदर हावी है कि जति देखकर अपराध दर्ज किए जाते है ।यह कारनामा थाने में पदस्थ 3  आरक्षक करते है जो बिगत कुछ माह के अंदर इस तरह जातिबद का जहर थाने में घोले है और थाना प्रभारी को अपने गिरफ्त लेकर सिर्फ जाति देखकर कार्यबाही करवाते है हाल ही में कनौजा गांव में हुई मारपीट में एससी एसटी का मामला एक बेगुनाह पर भी दर्ज करवा दिया जबकि फरियादी साफ साफ कहता है उक्त युवक को फर्जी फसाया जा रहा है वह घटना में शामिल नही था।  हाल ये है कि दिनभर थाने में यही देखा जा रहा है कि एससी एसटी के तहत कौन सा आवेदन आया है और किसे हरिजन एक्ट में फंसाने की साजिश रची जाए 
ये हाल है थानों का जब पुलिस अधीक्षक क्राइम मीटिंग लेते है तो उस समय थाना प्रभारी ऐसे भोले बनकर पहुचते है कि ईमानदारी के काम के सिवाह कुछ जानकारी ही नही है ।


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