यह निंदनीय है कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की बहाली के लिए, सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा : शोभा ओझा

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संविधान दिवस के अवसर पर, महाराष्ट्र में हुई लोकतंत्र की जीत, भारतीय प्रजातंत्र के लिए खुशी का अवसर


 


मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या कर बनाई गई, तीन दिन पुरानी भाजपा सरकार के गिरने पर, हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह दोहरी खुशी का अवसर है कि संविधान दिवस के अवसर पर संविधान और लोकतंत्र की जीत हुई है, हालांकि इस बात की निंदा की जानी चाहिए कि इसके लिए देश की सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।


आज जारी अपने बयान में श्रीमती ओझा ने महाराष्ट्र के घटनाक्रम पर उक्त टिप्पणी करते हुए आगे कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार जबसे सत्ता में आई है, तब से दागदार अतीत वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पूरे देश में भ्रष्टाचार के पैसों, ईडी, सीबीआई, इंकम टैक्स जैसी केन्द्रीय एजेंसियों और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के अधिकारों के दुरूपयोग से, गोवा, मणिपुर और कर्नाटक जैसे राज्यों में, प्रजातंत्र का मखौल उड़ाते हुए, जिस तरह से जनमत और लोकतंत्र की हत्याएं की, वह  भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय है। 



अपने बयान में श्रीमती ओझा ने केन्द्र सरकार और भाजपा पर उक्त तीखा हमला करते हुए आगे कहा कि मोदी-शाह की जोड़ी को महाराष्ट्र में जो करारा झटका लगा है, वह भारत की न्याय व्यवस्था, लोकतंत्र और संविधान के प्रति आम आदमी का विश्वास और मजबूत करेगा और इससे यह भी सिद्ध हो गया है कि भ्रष्टचार के पैसों से किये जाने वाले खरीद-फरोख्त के प्रयास, हर वक्त और हर जगह सफल नहीं हो सकते।


अपने बयान मे अंत में श्रीमती ओझा ने कहा कि कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना के शीर्ष नेतृत्व और उनके विधायकों ने, इस देश के ''फर्जी चाणक्य'' को महाराष्ट्र में जो मजा चखाया है, वह काबिल-ए-तारीफ़ है, केवल यही नहीं, इस पूरे घटनाक्रम से भारतीय संविधान में आस्था रखने वाले भारत के करोड़ों नागरिकों का, वह विश्वास भी और मजबूत होगा, जिसके बल पर भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बना हुआ है