झोला छाप के मामले मे क्यो बेबस हुए मंझगंवा एसडीएम हेमकरण धुर्वे ?


क्या खुद के कार्यालय के आदेश का पालन कराने मे सक्षम नही अनुविभागीय राजस्व अधिकारी मंझगंवा ? 
2 नवम्बर को आर.एल.विश्वकर्मा की क्लेनिक शील होने के बाद, सयुंक्त टीम बना सभी कथित डॉक्टरों पर कार्यवाही के जारी किए थे आदेश, दो महीने मे भी उक्त टीम ना कर सकी एक भी कार्यवाही ।


बड़ा सवाल क्या किराए नामे पर संचालित थी उक्त क्लेनिक, अगर टीम को गर्भ पात की दवाओ की  यूज शीशिया और रेपर मिले तो उक्त ने गर्भ पात भी किए होंगे, तो फिर बगल मे मेडिकल संचालित करने वाले मकान मालिक को भी रही होगी खबर, फिर क्यो कार्यवाही की बजाय खोल दिया मकान ?


खुद ही सवालो मे क्यो फंस रहे जिम्मेदार, जबकि उक्त डॉक्टर और मकान मालिक पर मामला पंजीबद्ध करवाने पर्याप्त थे तथ्य ? 


*मगर ताज्जुब सवालो के जवाब देने की बजाय मीडिया मे चल रही खबरो को देख ग्रूप से हट रहे हुजूर ।*