नोएडा में सस्ता प्याज ,सिर्फ पोस्टरों में, हकीकत इससे बिल्कुल अलग है जनाब


   
नोएडा प्रशासन की तरफ से जिले में 3 जगह 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज की बिक्री के स्टॉल लगाए जाने का दावा भी किया गया लेकिन हकीकत इससे उलट है.



नोएडा 100 रुपये किलो पहुंच चुकी प्याज की कीमत को काबू में करने के लिए नोएडा प्रशासन ने जमाखोरों और बेवजह रेट बढ़ाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी. सिटी मैजिस्ट्रेट शैलेंद्र कुमार मिश्र ने आदेश जारी किया कि कोई भी 40 रुपये प्रति किलो से ज्यादा में प्याज न बेचे और प्याज की जमाखोरी रोकने के लिए मोबाइल नंबर जारी किया. प्रशासन की तरफ से जिले में 3 जगह 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज की बिक्री के स्टॉल लगाए जाने का दावा भी किया गया लेकिन जब हम इस दावे की हकीकत देखने पहुंचे तो हमें प्याज तो नहीं मिला बस एक पोस्टर मिला जिस पर लिखा था प्याज ₹35 किलो. 



नोएडा सेक्टर-88 की मंडी में पता करने पर यह सच सामने आया कि यहां ₹35 किलो प्याज नहीं मिल रहा है बल्कि प्याज के दाम ₹70 किलो या उससे ज्यादा है. प्याज विक्रेताओं का कहना था कि वह इतने कम दामों पर प्याज नहीं भेज सकते क्योंकि प्याज उन्हें महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है और ₹35 किलो बेचने से उन्हें भारी नुकसान होगा. नोएडा सेक्टर-82 की सब्जी मंडी में भी प्याज ₹70 प्रति किलो के हिसाब से ही बिक रहा है. सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद कुछ दुकानों ने प्याज बेचना ही बंद कर दिया है क्योंकि ₹35 किलो प्याज बेचना उनके लिए संभव नहीं है.



क्यों बेकाबू हुए प्याज के दाम 
इस साल मॉनसून सीजन के दौरान कई राज्यों में बहुत ज्यादा बारिश हुई. इससे प्याज की फसल खराब हो गई. बारिश के कारण कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और कुछ अन्य राज्यों में फसल को 75 से 85 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा. सूत्र बताते हैं कि सरकार ने हालात को भांपने में देरी की और समय रहते प्याज के निर्यात पर रोक नहीं लगाई. इसके साथ ही उसने रबी सीजन में 500 करोड़ रुपये के ऑपरेशन ग्रीन फंड से पर्याप्त मात्रा में प्याज नहीं खरीदा.



प्याज के आयात का ऑर्डर देने में भी उसने देरी की. देश में प्याज की भारी मांग की जानकारी होने के बावजूद पहले सिर्फ 4500 टन प्याज आयात किया गया. इससे बात न बनती देख अब हाल में ही एक लाख टन प्याज के आयात का ऑर्डर दिया गया है. माना जा रहा है कि यह प्याज दिसंबर के दूसरे हफ्ते तक भारत पहुंचेगा और उसके बाद हालात कुछ बेहतर होने के आसार हैं ।