पत्रकारों को सच दिखाने की मिल रही है सजा सरकारे साजिश रच कर रहीं प्रताड़ित

 


 


लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ मीडिया जिसको चरितार्थ करने के लिए कुछ पत्रकारों को अपनी जान गवानी पड़ी तो कुछ पत्रकारों को जेल की भी हवा खानी पड़ी ।वही कुछ पत्रकार राजनीती और नौकरशाही के चासनी में डूबे हुए है जिनसे इस चौथे स्तम्भ को खतरा है।कर्नाटक विधान सभा में अश्लील वीडियो देखने वाले माननीय को उजागर करने वाले पत्रकार को पुलिस 12 -12घंटे बैठा के पूछताछ करती रही और वही माननीय आज मंत्री बन के बैठे है।।वही इस चाशनी से निकलकर कुछ पत्रकार सच बोलने की सच को दिखाने की हिम्मत करते है तो उनके ऊपर गैंगेस्टर जैसी आपराधिक धारा लगा के प्रताड़ित किया जाता है ये करवाई नोयडा पुलिस ने अपने आकाओं को खुश करने के लिए किया था कि तब तक मिड डे मिल मिर्जापुर का मामला जहाँ अमानवीयता भी शर्मशार हो जाये जहाँ बच्चों को नमक और सुखी रोटी परोसी गयी थी और इस काले सच को दिखाने की हिम्मत जिस पत्रकार ने की आज उसके खिलाफ भी करवाई की जा रही है कि उसने उत्तरप्रदेश सरकार के खिलाफ कही साजिश तो नहीं की ।।वाह रे सरकार साजिश तो आप की सरकार और आप की बेलगाम पुलिस कर रही है क्या आप के रामराज्य में सच बोलना अपराध है। मिर्जापुर जैसे अमानवीयता को दिखाना गुनाह है। एक और उठती हुई आवाज को दाबने की कोशिश, और पत्रकार को दिखाया गया जेल का रास्ता बहराइच पुलिस के हौसले बुलंद हैं। आप को ये बुरा लग गया की जो चौथा स्तम्भ है उसका काम ही आप की दलाली करना है तो ये अचानक कुछ पत्रकार जिन्दा कैसे हो गए तो साहब आप का और आप के पुलिस का ज़मीर मर गया होगा लेकिन अभी भी चौथा स्तम्भ पूरी तरह से मरा नहीं है और आप की चूले हिलाने की ताकत अभी बरक़रार है।✍✍