जनता के हितार्थ कार्य ही मेरी पहली प्राथमिकता : सुनील सराफ

Apna Lakshya News 


By: Chandan Kewat


कोतमा/ अनूपपुर जिले के कोतमा में समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों के दलों ने समस्त शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर  गरीब एवं असहाय लोगों की सेवा कर कोरोना वायरस के साथ चल रही इस विश्वव्यापी लड़ाई में जबरदस्त भूमिका निभाई, जिससे इस अदृश्य शत्रु से लड़ाई में आमजन को एक बल मिल सका। इस राजनीतिक और अहम की लड़ाई में कोरोना की लड़ाई को भुला दिया गया और इस लड़ाई में जीत किसी की भी हुई हो लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा ,उस गरीब जनता को, जिनकी निगाहें प्रतिदिन इन दानवीरो की राह पर टिकी हुई थी कि वे आएंगे तो हम भोजन कर सकेंगे।



 प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता


अनूपपुर जिले में माननीय कलेक्टर महोदय सहित समस्त जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी जान पर खेलकर इस भीषण महामारी की परवाह किए बिना बखूबी अपना फर्ज निभाया है लेकिन प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है कि इस बुरे दौर में बहुत से ऐसे परिवार हैं,जिनका आज लगभग डेढ़ से दो महीने से किसी भी प्रकार से आय का साधन नहीं है और इस लंबे लॉक डाउन की अवधि में कुछ पहले की बचाई हुई राशि और कुछ वितरित किए गए खाद्य सामग्री का प्रयोग कर जीवन निर्वाह कर रहे थे लेकिन अब ऐसी स्थिति है कि जमा राशि भी समाप्त हो चुकी है और जो अन्य लाभ मिल रहे थे वो भी ज़मीनी स्तर पर नहीं मिल पा रहे हैं।अब तक स्थिति ये थी कि हमारा जिला ऑरेंज जोन में था अर्थात हमारे जिले में भी महामारी का आगाज़ हो चुका था, अब हमारे स्वास्थ्य कर्मियों और अन्य कोरोना वैरियर्स के समर्पण से आज अनूपपुर को पुनः कोरोना रहित होने की सौगात मिली है।लेकिन लड़ाई यहीं खत्म नहीं होती है, वास्तव में अब लॉक डाउन के सख्ती से पालन किए जाने की आवश्यकता आन पड़ी है लेकिन यदि लोगो को भोजन नहीं मिलेगा,उनकी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी नहीं होंगी तो तो स्थिति भयानक रूप ले लेगी।जब आम जनता भूख से बिलखती हुई सड़कों पर उतरेगी तो स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा।जो भी समाजसेवी और जनप्रतिनिधि अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर राशन बांट रहे थे ,वो अपनी राजनीतिक लड़ाई और अहम में जीत गए या हार गए, ये तो बात की बात है लेकिन उस भूख से बिलखते परिवार से पूँछिए कि इसमें किसकी जीत हुई है, राजनीतिक पार्टियों की या प्रशासन की?जीत किसी की भी हुई हो साहब, लेकिन हार हर हाल में उस भूखे पेट की हुई है जो हाँथ पैर सलामत होने के बाद भी दो वक्त की रोटी के लिए किसी के एहसान का मोहताज है।


 जब मदिरालय खोले जा सकते हैं तो देवालय क्यों नहीं


पूरे प्रदेश में लगभग सभी जगहों पर मदिरालय खोलकर महामारी पर नियंत्रण करने की सरकारी नीति समझ से परे है, जब पिछले 40 - 45 दिनों के कठिन परिश्रम के बाद भी स्थिति को पूर्ण रूपेण नियंत्रण में नहीं लाया जा सका और लगातार देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती ही जा रही है तो क्या इस स्थिति में शराब दुकान और अन्य अनुपयोगी चीजों को खोलना सरकार का सावधानी भरा कदम है या इसके पीछे कोई और बात है। रेड जोन से गरीब मजदूरों को ग्रीन जोन में भिजवाया जा रहा है और वो भी धीरे धीरे ऑरेंज जोन में परिवर्तित हो रहे हैं।सरकार और प्रशासन के द्वारा निर्धारित की गई  नियमावली में लापरवाही बरतने का परिणाम बहुत ही भयावह स्थिति उत्पन्न कर सकता है और इसके द्वारा होने वाले विनाश का अंदाज़ा भी नहीं लगाया जा सकता है। मदिरालय पर लोगों का जत्था इस प्रकार लगा हुआ है ,जैसे अमृत पान करने की होड़ लगी हुई है,लेकिन देवालयों में आज भी दीपक नहीं जलाए जा रहे हैं। कम से कम मंदिर के पुजारी को मंदिरों में जाकर अकेले ही सुबह शाम पूजा करने की अनुमति प्रदान की जानी चाहिए, इस संकट काल में कोतमा विधायक ने देवालयों को भी खोले जाने की मांग करते हुए माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए पत्र लिखकर उनका ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है।अब देखना है कि आने वाले दिनों में सरकार क्या फैसला लेती है।


 क्या देवालयों की भीड़ मदिरालयों से भी अधिक हो सकती है


कोतमा विधायक ने सरकारी नीति पर सवालिया निशान लगाया है कि धर्म और आस्था का प्रयोग केवल वोट के लिए करना उचित नहीं है। जब पूरे देश में शराब दुकानों को खोलने की अनुमति दी सकती है तो क्या देव स्थलों को सुबह शाम खोलने खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ क्यों? क्या देवालयों में शराब की दुकानों से भी ज्यादा लोग एकत्रित होंगे।


 कोतमा क्षेत्र के मरीजों को चिकित्सा के लिए छत्तीसगढ़ में जाने की अनुमति मिलनी चाहिए


कोतमा विधायक ने कोतमा क्षेत्र के मरीजों के लिए चिकित्सा के लिए मनेन्द्रगढ़ जाने के लिए अनुमति को प्राथमिकता देते हुए छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी से चर्चा की कि कोतमा के बहुत से मरीज इलाज़ के लिए मनेन्द्रगढ़ पर आश्रित हैं,तो इस दृष्टिकोण से कोतमा के लोगों को ई पास न मिलने पर डॉक्टर की पर्ची दिखाकर जाने की अनुमति दी जाय।विगत दिनों कोतमा क्षेत्र के एक सेवानिवृत्त शिक्षक की एम पी/सी जी बॉर्डर पर सही समय पर उपचार न मिलने से हृदयाघात से मौत हो गई थी।इस मामले को गंभीरता से लेते हुए  कोतमा एस डी एम, कोतमा तहसीलदार और अन्य अधिकारियों सहित कोतमा विधायक ने कोतमा के मरीजों को चिकित्सीय लाभ हेतु मनेन्द्रगढ़ जाने का विकल्प बना दिया है, जिससे कि मरीजों को सही समय पर उचित स्वास्थ्य लाभ मिल सके।